Divya Jyoti Foundation
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  1. Samadhi

    Samadhi

    Book - Hindi

    समाधि क्या है? जीवन के अनंत प्रवाह में न मृत्यु रूपी अर्ध विराम! न ही ब्रह्म-विलीनता अथवा मोक्ष रूपी पूर्ण विराम! यह तो चेतना का अस्थाई रूप से परमानंद में वास है। सीमित समय के लिए आत्म-तत्त्व का देह से अलगाव है। दिव्य कार्यों की पूर्ति हेतु चेतना की ऊर्ध्व-लोकों में अनित्य यात्रा है। Learn More
    Rs25.00
  2. Samadhi

    Samadhi

    What is Samadhi? It is neither a comma of death in the incessant flow of life! Nor is it a full-stop marked by moksha or merger into the Brahman (supreme consciousness). It is in fact the esoteric state wherein the consciousness revels temporarily in the beatific oasis of supreme bliss. It is only an impermanent departure of the atma-tattva (soul or pure consciousness) from the physical garb, a transient expedition of consciousness into the outer cosmic space, to accomplish divine objectives. Learn More
    Rs50.00
  3. Hum or Hamare Aradhya Bhagwan Shiv

    Hum or Hamare Aradhya Bhagwan Shiv

    Book

    वास्तव में, हमारी भक्ति का फल तो स्वयं भगवान शिव ही हैं। यदि वे मिल जाएँ तो समझो सभी पूजा-पाठ सफल हो गया। परन्तु यक्षप्रश्न तो यही है कि हमारे आराध्य भगवान भोलेनाथ का दर्शन हमें कहाँ हो!

    इस गहन तथ्य को हम बड़े ही सहज रूप से एक प्रसिद्ध शिव-स्तुति से समझ सकते हैं-    

    ऊँ कर्पूरगौरं करुणावतारं संसार सारम् भुजगेन्द्रहारं               

    सदा वसंतम् हृदयारविन्दे भवं भवानि सहितम् नमामि।

    वे भगवान शिव, जिनका वर्ण कपूर की तरह गौर है अर्थात् जो प्रकाशरूप हैं, करूणा के अवतार हैं, संसार के सार हैं, सर्पों के हार पहनते हैं, जो सभी हृदयों में सदा निवास करते हैं- उन्हीं को मैं माँ भवानी सहित नमन करता हूँ।

    जैसा कि इसमें स्पष्ट लिखा है- ‘जो सदा हृदय में वास करते हैं, उन भगवान शिव को मैं नमन करता हूँ।’ अतः अब दूसरा यक्षप्रश्न यह उठता है कि जो भगवान शिव हमारे हृदय में सदा-सदा निवास करते हैं, उन्हें हम आज तक क्यों नहीं देख पाए? उनका दर्शन कैसे हो? आइए, इसी तथ्य पर अब हम चर्चा करते हैं... ...!

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  4. Saachi Preet

    Saachi Preet

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    पूर्ण गुरु और उनके समर्पित शिष्य के बीच एक मधुर निकटता होती है। सतगुरु शिष्य को कहते हैं- ‘मम व्रते ते हृदयं दधमि’- मैं तेरे हृदय को अपने हृदय में ग्रहण करता हूँ। ‘मम वाचं एकमना’- आओ, हम एकमना हो जाएँ।... इस तरह दोनों के हृदय एक सूत्रा में बंध जाते हैं। गुरु के ब्रह्मविचार शिष्य के हृदय को बदलने को विवश कर देते हैं। दूसरी ओर, शिष्य की सारी भावनाएँ, प्यार और विश्वास गुरु-हृदय तक पहुँचता है।

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  5. Har Yug Ki Pukar

    Har Yug Ki Pukar

    Book

    गुरुमुख- तो मनमुख साहब, उपाय सुना आपने? मुनि जी ने कितने स्पष्ट और खरे शब्दों में हम गृहस्थियों को कल्याण का सीधा-सरल रास्ता दर्शाया- संत-संगति यानी पूर्ण गुरु की शरणागति!

    मनमुख (थोड़ा चिढ़कर) - हुँ, पर यह रास्ता इतना सीध और सरल भी नहीं है... खासकर मेरे जैसे के लिए, जिसका मन गुरु-वुरु धरण करने को कतई तैयार नहीं।

    गुरुमुख (स्नेहपूर्वक) -  समझता हूँ! तेरी मनोदशा को मैं भली-भांति पढ़ पा रहा हूँ...तेरे मन को मनाने के लिए ही तो तुझे इस अद्भुत यात्रा पर लेकर आया हूँ...चल, चलते हैं हम अलग-अलग युगों की सैर पर...

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  6. Bhakti Ke Anuthe Rang

    Bhakti Ke Anuthe Rang

    Book

    एक तालाब में मछली, कछुआ, मेंढक, मगरमच्छ आदि बहुत से जल-जीव रहा करते थे। एक बार कुदरत की मार से उस तालाब का जल सूखने लगा। चिंता तो सभी को हुई। पर मछली तो तड़प उठी। fफक्र के मारे बदहवास सी हो चली। किसी ने उससे पूछा- ‘तुझे ही इतनी fफक्र क्यों है? और भी तो हैं! वे तो इतने चिंतित नहीं दिखाई दे रहे!’ मछली ने कहा, ‘अरे भई, वे सभी तो जल के उपभोक्ता हैं। पर मेरे लिए तो जल जीवन है। वे तो यहाँ मौज-मस्ती के लिए आते हैं। इससे जुदा होकर भी जी सकते हैं। पर मैं नहीं! जल तो मेरा प्राण है। यही मेरा ठौर है, यही ठिकाना है।’ एक सच्चे शिष्य की दशा भी एक मछली की तरह हो जाती है, जिसका साईं सबकुछ है। Learn More
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  7. Nav varsh kab aur kaise

    Nav varsh kab aur kaise

    Book

    ग्रेगोरियन कैलेंडर में कुछ नौसिखिये पहलू भी दिखाई पड़ते हैं। जैसे कि अर्धरात्रि को 12.00 बजे घुप्प अंधकार के बीच, जब सारी दिनचर्या ठप्प पड़ जाती है- तब ग्रेगोरियन कैलंडर के हिसाब से नया दिन करवट लेता है। आधी रात को तिथि बदल जाती है! पर वहीं दूसरी ओर, भारतीय संवत् के अनुसार हर सुर्योदय के साथ, जब धरा पर नांरगी किरणें बिखरती हैं, तब नया दिन चढ़ता है। माने सूर्यदेव के दर्शन के साथ ही नए दिन का सुस्वागतम्! कहिए, कौन सी बात ज्यादा जंचती है?

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    Rs10.00
  8. Guru Mureed - Sai Bulleshah

    Guru Mureed - Sai Bulleshah

    Book

    बुल्लेशाह- एक ऐसी शख्सीयत है, जो मुरीदी के साँचे में पूरा-पूरा ढला था। जिसने इलाही इश्क के सबसे उँचे शिखर पर अपने प्रेम का झंडा फहराया था। मुर्शिद-प्रेम के गलियारों से गुजरकर खुदा को पाया था। कबीर जी ने कहा है- सुरत कलारी भई मतवारी, मध्वा पी गई बिन तौले। बुल्लेशाह वही है, जो अपने मुर्शिद के प्रेम की मधवा को बिन तौले पी गया था। तभी तो जीवन भर रूहानी इश्क के घुँघरू बांधकर थैया-थैया नाचता रहा- तेरे इश्क नचाया कर थैया-थैया...। उसने अपनी हर सांस, हृदय का हर स्पंदन, रोम-रोम की थिरकन गुरु-प्रेम में कुरबान कर डाली थी। अपना सर्वस्व उनकी जुदाई की आग में हवि कर दिया था। नीर नहीं, नैनों में लहू भरकर वह मुर्शिद के इश्क में दिन-रैन रोया था- मैं लहू नैण भर रोई। Learn More
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  9. Guru Darshan
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  10. Hum or Hamare .....Shri Ganpati
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