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Saachi Preet

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Saachi Preet

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पूर्ण गुरु और उनके समर्पित शिष्य के बीच एक मधुर निकटता होती है। सतगुरु शिष्य को कहते हैं- ‘मम व्रते ते हृदयं दधमि’- मैं तेरे हृदय को अपने हृदय में ग्रहण करता हूँ। ‘मम वाचं एकमना’- आओ, हम एकमना हो जाएँ।... इस तरह दोनों के हृदय एक सूत्रा में बंध जाते हैं। गुरु के ब्रह्मविचार शिष्य के हृदय को बदलने को विवश कर देते हैं। दूसरी ओर, शिष्य की सारी भावनाएँ, प्यार और विश्वास गुरु-हृदय तक पहुँचता है।

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Product Description

पूर्ण गुरु और उनके समर्पित शिष्य के बीच एक मधुर निकटता होती है। सतगुरु शिष्य को कहते हैं- ‘मम व्रते ते हृदयं दधमि’- मैं तेरे हृदय को अपने हृदय में ग्रहण करता हूँ। ‘मम वाचं एकमना’- आओ, हम एकमना हो जाएँ।... इस तरह दोनों के हृदय एक सूत्रा में बंध जाते हैं। गुरु के ब्रह्मविचार शिष्य के हृदय को बदलने को विवश कर देते हैं। दूसरी ओर, शिष्य की सारी भावनाएँ, प्यार और विश्वास गुरु-हृदय तक पहुँचता है।

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