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Bhakti Ke Anuthe Rang

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Bhakti Ke Anuthe Rang

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एक तालाब में मछली, कछुआ, मेंढक, मगरमच्छ आदि बहुत से जल-जीव रहा करते थे। एक बार कुदरत की मार से उस तालाब का जल सूखने लगा। चिंता तो सभी को हुई। पर मछली तो तड़प उठी। fफक्र के मारे बदहवास सी हो चली। किसी ने उससे पूछा- ‘तुझे ही इतनी fफक्र क्यों है? और भी तो हैं! वे तो इतने चिंतित नहीं दिखाई दे रहे!’ मछली ने कहा, ‘अरे भई, वे सभी तो जल के उपभोक्ता हैं। पर मेरे लिए तो जल जीवन है। वे तो यहाँ मौज-मस्ती के लिए आते हैं। इससे जुदा होकर भी जी सकते हैं। पर मैं नहीं! जल तो मेरा प्राण है। यही मेरा ठौर है, यही ठिकाना है।’ एक सच्चे शिष्य की दशा भी एक मछली की तरह हो जाती है, जिसका साईं सबकुछ है।

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Product Description
एक तालाब में मछली, कछुआ, मेंढक, मगरमच्छ आदि बहुत से जल-जीव रहा करते थे। एक बार कुदरत की मार से उस तालाब का जल सूखने लगा। चिंता तो सभी को हुई। पर मछली तो तड़प उठी। fफक्र के मारे बदहवास सी हो चली। किसी ने उससे पूछा- ‘तुझे ही इतनी fफक्र क्यों है? और भी तो हैं! वे तो इतने चिंतित नहीं दिखाई दे रहे!’ मछली ने कहा, ‘अरे भई, वे सभी तो जल के उपभोक्ता हैं। पर मेरे लिए तो जल जीवन है। वे तो यहाँ मौज-मस्ती के लिए आते हैं। इससे जुदा होकर भी जी सकते हैं। पर मैं नहीं! जल तो मेरा प्राण है। यही मेरा ठौर है, यही ठिकाना है।’ एक सच्चे शिष्य की दशा भी एक मछली की तरह हो जाती है, जिसका साईं सबकुछ है।
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